Tuesday, 4 February 2020

jadui kalin hindi kahani | jadui kalin ki kahani | jadui kalin story | CHIKU TOONS

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जादुई कालीन

बहुत समय पहले की बात है शिशुपूर नाम का एक गांव था जो कि उसके राजा शिशुपाल के नाम पर रखा गया था राजा का एक मंत्री था जोकि बहुत लालची था वह गांव वालों को डराता धमकाता और जबरन उनसे अनाज , पैसा और समान मुफ्त में ले लिया करता उसी गांव में एक कालीन की दुकान थी जिसे अखिलेश नाम का एक युवक चलाता था एक दिन अखिलेश शहर सामान लेने गया और उसने अपने बेटे रवि को कहा अखिलेश: बेटा मैं शहर जा रहा हूं आज तुम दुकान का ध्यान रखना रवि: ठीक है पिताजी रवि जब दुकान पहुंचा अचानक से तेज हवा चली और एक काले उड़ के उसके दुकान के सामने आकर गिरी रवि: अरे यह कालीन तो बहुत सुंदर है पर यह आई कहां से रवि कहकर जैसे ही कालीन पर खड़ा हुआ कालीन उड़ने लगी पहले तो रवि डर गया फिर उसे एक आवाज सुनाई दी डरो मत मैं जादुई कालीन हूं मैं किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती पर मेरा उपयोग सिर्फ भले कामों के लिए करना और कभी अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं रवि को सभी बात समझ में आ गई अब रवि ने पूछा रवि: यह सब तो ठीक है पर नीचे कैसे उतरेंगे कालीन से आवाज आई बस तुम्हें कहना है गिली गिली छू जादुई कालीन यही उतर जा तू रवि ने कहा रवि: मुझे सैर कराने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद गिली गिली छू जादुई कालीन मेरी दुकान में उतर जा तू कालीन दुकान के सामने जाकर उतर गए हैं तभी नदी के पिताजी आ गए और रवि ने सारी बात अपने पिताजी को बताएं तब से रवि उस कालीन को लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल करता जैसे लोगों को एक गांव से दूसरे गांव ले जाना दिव्यांग लोगों की मदद करना और बीमार और जख्मी लोगों को अस्पताल पहुंचाना कभी-कभी अपने गांव के बच्चों को भी उस की सैर करा देता धीरे-धीरे मंत्री तक पहुंच गई मंत्री अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंचा और बोला मंत्री: यह कालीन तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है यह राज्य की संपत्ति है और इस पर सिर्फ राजा का हक है ऐसे ही कालीन में खड़ा हुआ उड़ गई पर अब नीचे कैसे उतरे इसका उसे ज्ञान ना था और वह कालीन में पूरी दुनिया का चक्कर लगाता रहा

Thursday, 30 January 2020

sone ki kulhadi story in hindi | golden axe story moral in hindi | Chiku Toons

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सोने की कुल्हाड़ी

बहुत समय पहले की बात है रामू और भीमा नाम के दो लकड़हारे रहते थे रामू बहुत ही मेहनती और ईमानदार था वही भीमा बहुत आलसी और लालची था रामू रोज सुबह जंगल लकड़ी काटने निकल जाता और भीमा सोता है अभी तक सो रहे हो देखो रामू भैया कब के जंगल निकल गए लकड़ी काटने रामू तो पागल है जो सुबह सुबह निकल जाता है जंगल से पेड़ कहीं भाग तो नहीं जाएंगे सुबह-सुबह की नींद का क्या आनंद है वह मूर्ख क्या जाने रामू सुबह-सुबह लकड़ियां काटकर बाजार में बेचने निकल जाता और शाम तक घर वापस आ जाता एक दिन वह नदी के किनारे पहुंचा तो वहां उसे एक बहुत मजबूत पेड़ दिखा अरे वाह कितना मजबूत पेड़ है अगर आज मैं इसे काट लूं तू अच्छे पैसे कमा सकता हूं और वह पेड़ काटने लगा पेड़ बहुत मजबूत था और काटते काटते दोपहर हो चली थी वह बहुत थक गया था थोड़ा पानी पी लेता हूं और आराम कर लेता हूं फिर काट लूंगा इस पेड़ को जैसे ही रामू पानी पीने के लिए नदी के किनारे झुका उसकी कुल्हाड़ी फिसल के नदी में गिर गई वह जोर जोर से रोने लगा और दुखी हो गया तभी नदी से एक जलपरी बाहर निकली और बोली क्या हुआ तुम क्यों रो रहे हो रामू ने जलपरी को प्रणाम किया और बोला देवी मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई मैं एक गरीब लकड़हारा हूं और वह मेरी आजीविका का आखिरी साधन है जलपरी ने एक सोने की कुल्हाड़ी निकाली और बोली क्या या तुम्हारी कुल्हाड़ी है नहीं देवी फिर जलपरी ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली और कुछ क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है जी नहीं देवी जलपरी ने रामू की कुल्हाड़ी निकाली और बोली क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है जी देवी यही है मेरी कुल्हाड़ी जलपरी रामू की इमानदारी से बहुत प्रसन्न हुई और उसने रामू को तीनों कुल्हाड़ी दे दी रामू कुल्हाड़ी लेकर खुशी-खुशी घर जाने लगा अरे आज यह रामू 3-3 कुल्हाड़ी लेकर कहां से आ रहा है और वह चुपके से उसकी झोपड़ी के पास पहुंच गया पापा यह तीन कोलाडिया कहां से मिली और रामू ने सारी बात चीकू को बताई और भीमा सब कुछ सुन रहा था अगले दिन भीमा सुबह-सुबह ही जंगल निकल गया और नदी के पास पहुंचकर अपनी कुल्हाड़ी जानबूझकर नदी में फेंक दी और दहाड़े मार कर रोने लगा हाय मेरी कुल्हाड़ी हाय मेरी कुल्हाड़ी अब तो मैं भूखों मर जाऊंगा तभी नदी से जल परी बाहर आई वह समझ गई थी कि भीमा ने जानबूझकर कुल्हाड़ी नदी में डाली है क्या हुआ तुम क्यों रो रहे हो मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है वही मेरी अजीब का का आखरी साधन है जलपरी ने भीमा को उसकी कुल्हाड़ी दिखाई और बोली क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है भीमा की चाल उल्टी पड़ गई थी नहीं यह मेरी नहीं है फिर परी ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली और बोली क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है नहीं यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है फिर जलपरी ने सोने की कुल्हाड़ी दिखाई और पूछा क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है हां यही है मेरी कुल्हाड़ी तुम बहुत नीच और धूर्त हो और वह जलपरी गायब हो गई
अब भी मत सच में दुखी हो गया और परी से कम से कम उसकी कुल्हाड़ी वापस करने की विनती करने लगा